Category Archives: Motivational

Motivational Poems

मेरी तमन्नाएँ

मेरी तमन्नाएँ,
ये मुझसे कुछ कहती हैं,
एक सवाल पूछती हैं,
एक जवाब मांगती हैं|

कभी तेज़ किसी तूफान सी,
मेरे मन में उठती जाती हैं|
इस जग माया के जंगल में,
कभी कई दिनों खो जाती हैं|
कभी दर्द दे जाती हैं,
कभी मरहम बन जाती हैं,
एक सवाल पूछती हैं,
एक जवाब मांगती हैं|

मैं कुछ भी न कह पाऊं,
कभी चुप सा कर देती हैं|
मैं उन्हें ही जपता जाऊं,
कभी चुप ही नहीं होती हैं|
कभी खिलखिला देती हैं
कभी मायूस हो जाती हैं,
कभी पास नज़र आती हैं,
कभी दूर चली जाती हैं,
एक सवाल पूछती हैं,
एक जवाब मांगती हैं|

तुम सबके मन की करते हो,
न अपने दिल की सुनते हो|
सब ही तुमको क्यूँ प्यारे हैं,
एक हम ही क्यूँ पराये हैं?
एक ताना दे जाती हैं,
एक कटाक्ष कर जाती हैं,
एक सवाल पूछती हैं,
एक जवाब मांगती हैं|

और मैं ये समझाता हूँ,
अभी समय नहीं आया है|
मैं इनको बतलाता हूँ,
संदेहों का साया है|
इतना आसान ही होता,
जो चाहते वो कर जाते|
इतना आसान ही होता,
जो चाहते वो पा जाते|
मेरी आखें नम  जाती हैं,
फिर पलकें झुक जाती हैं|
एक सवाल पूछती हैं,
एक जवाब मांगती हैं|

मेरी तमन्नाएँ,
ये मुझसे कुछ कहती हैं,
एक सवाल पूछती हैं,
एक जवाब मांगती हैं|

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वो मेरे ख्याल बांध नहीं सकते

वो शब्दों को बांध सकते हैं
मेरे ख्याल बांध नहीं सकते
वो कदम तो रोक सकते हैं
मेरे मन को बांध नहीं सकते |

बादल को किसने रोका है
बरसात को किसने रोका है
रौशनी को आना होता है
इस सुबह को किसने रोका है
वो दरवाज़े तो बंद कर सकते हैं
दिन और रात बांध नहीं सकते
वो शब्दों को बांध सकते हैं
मेरे ख्याल बांध नहीं सकते |

ये सूरज, चंदा, तारे सब
ये थे, ये हैं, ये सब होंगे,
ये कभी न मिटने पाएंगे
हम न होंगे पर ये होंगे
वो घडी को तोड़ सकते हैं
समय चक्र को बांध नहीं सकते|
वो शब्दों को बांध सकते हैं
मेरे ख्याल बांध नहीं सकते |

जैसे नदिया चंचल बहती है
जैसे कोयल बेसुध गाती है
जैसे बच्चे हँसते रोते हैं
बेफिकर से होके सोते हैं
वो नींदों को छीन सकते हैं
पर ख़्वाब बांध नहीं सकते
वो शब्दों को बांध सकते हैं
मेरे ख्याल बांध नहीं सकते |

आज़ादी सबको प्यारी है
फिर शब्दों को ही क्यों बांधें हम
मेरी कविता सबसे पूछे ये
पंछी के पंख क्यों काटें हम
वो कुछ देर सांसें रोक सकते हैं
पर धड़कनों को बांध नहीं सकते
वो शब्दों को बांध सकते हैं
मेरे ख्याल बांध नहीं सकते|
वो कदम तो रोक सकते हैं
मेरे मन को बांध नहीं सकते |

सपनों की पतंगें

ख्वाहिशों की डोर से
सपनों की पतंगें उड़ा लेता हूँ,
कभी हलके, कभी कसे
अपनी मेहनत के कन्ने बांध लेता हूँ ||

मेरे पास सपनों की
कई रंग बिरंगी पतंगें हैं
कुछ सस्ती कुछ महँगी
कुछ छोटी कुछ बड़ी पतंगें हैं
इस जहाँ में उनकी कोई दुकान नहीं
तो अपने ही मन से उन्हें खरीद लेता हूँ |
कभी हलके, कभी कसे
अपनी मेहनत के कन्ने बांध लेता हूँ ||

एक सपने की पतंग
कभी सुबह उडाता हूँ,
तो दूसरे सपने की पतंग
शाम को लहराता हूँ
रात नींद की बाँहों में
ये सारी पतंगें सहेज लेता हूँ |
कभी हलके, कभी कसे
अपनी मेहनत के कन्ने बांध लेता हूँ ||

वक़्त की ये हवा
जब धीमी सी बहती है,
मेरी कोई एक पतंग
कभी उड़ती कभी गिरती है
उम्मीद की थपकी से
उसे थोड़ा-थोड़ा बढ़ा लेता हूँ |
कभी हलके, कभी कसे
अपनी मेहनत के कन्ने बांध लेता हूँ ||

आकांक्षाओं के आकाश में
अनगिनत ऐसी पतंगें उड़ती होंगी
कुछ साथ-साथ बढ़ती
तो कुछ साथ-साथ कटती होंगीं
मेरी भी पतंग कहीं कट के गिर न जाये
कभी दाएं कभी बाएं
एक तेज़ खेंच से उसे बचा लेता हूँ |
कभी हलके, कभी कसे
अपनी मेहनत के कन्ने बांध लेता हूँ ||

ख्वाहिशों की डोर से
सपनों की पतंगें उड़ा लेता हूँ,
कभी हलके, कभी कसे
अपनी मेहनत के कन्ने बांध लेता हूँ ||

वो सितारों से सपने सजा गया

ज़मीं पे निगाह रख चलने वाला
आसमां से टकरा गया,
मिट्टी से कभी अपने ख़्वाब रंगने वाला,
सितारों से सपने सजा गया|

कभी एक रोटी उसकी चाह थी
कभी बहुत छोटी उसकी राह थी,
छोटे छोटे कदम बढ़ाते हुए
वो एक लम्बी छलांग लगा गया,
मिट्टी से कभी अपने ख़्वाब रंगने वाला,
सितारों से सपने सजा गया|

किसी से आँख मिलाने से जो डरता था
सब से अपना रस्ता बचा के जो चलता था,
धीरे धीरे अपनी आशाओं के सागर में
अपनी एक अलग कश्ती तैरा गया,
मिट्टी से कभी अपने ख़्वाब रंगने वाला,
सितारों से सपने सजा गया|

कभी कुछ लोग उसपे हँसते थे
भले बुरे ताने कसते थे
उनके ठहाकों को दिल से लगा
संघर्ष की अग्नि से वो खुद को चमका गया,
मिट्टी से कभी अपने ख़्वाब रंगने वाला,
सितारों से सपने सजा गया|

जीवन के कई पल उसने अकेले काटे थे
कुछ ही अफ़साने किसी के साथ बांटे थे
तन्हाई में खुद से बातें करते,
अपने ख्यालों में बुनी,
एक हसीन दास्ताँ वो सबको सुना गया,
मिट्टी से कभी अपने ख़्वाब रंगने वाला,
सितारों से सपने सजा गया|
ज़मीं पे निगाह रख चलने वाला
आसमां से टकरा गया||

“नई सुबह”

है सुबह नई
ये वक़्त नया
सुबह जगने का एहसास नया
क़िस्मत से मुझे मिले इस पल में
मेरे जीने का अंदाज़ नया|

जो बीता था वो पुराना था
था अपना और न बेगाना था
अच्छा था वो या फिर था बुरा
पल जैसा भी था सुहाना था
अब गाना है फिर गीत नया
संगीत नया और सुर भी नया|
क़िस्मत से मुझे मिले इस पल में
मेरे जीने का अंदाज़ नया||

कल की अब फिक्र करूँ क्यों मैं
कल की अब चाह भरूँ क्यों मैं
कल का हर पल अनजाना है
तो क्यों न ये पल जी लूँ मैं
इस पल में मेरा विश्वास नया
एक सोच नयी, जज़्बात नया|
क़िस्मत से मुझे मिले इस पल में
मेरे जीने का अंदाज़ नया|

एक नई दास्ताँ ज़रूरी है
ख़ुद की पहचान ज़रूरी है
एक जैसा अब तक जीता था
एक नई पहचान ज़रूरी है
अब करना है कोई काम नया
एक राह नई, एक मुकाम नया|
क़िस्मत से मुझे मिले इस पल में
मेरे जीने का अंदाज़ नया|

“संघर्ष”

जब साथ तुम्हारे ख़ुशी न हो
अधरों पे झूठी हंसी न हो
जब मार्ग तुम्हें कोई दिखे नहीं
संघर्ष विकल्प कोई बचे नहीं
तब, नस नस में बहता खून खून
रग रग में उठता ये जूनून
हर पल सहता, हर पल कहता
संघर्ष करो, संघर्ष करो||

जब रात दिन में भेद न हो
और प्रियजनों का मेल न हो
तपती गर्मी की छाया हो
न हाथ तुम्हारे माया हो
तब, सांसों का बढ़ता महावेग
आँखों में आता रक्त तेज़
हर पल सहता, हर पल कहता
संघर्ष करो, संघर्ष करो||

जब पथ में कांटे बिछे रहें
और दुःख के बादल घिरे रहें
जब प्यास तुम्हारी बुझे नहीं
एक बूँद सफलता मिले नहीं
तब, धड़कन का हर गति परिवर्तन
हर अंग में होता ये कम्पन
हर पल सहता, हर पल कहता
संघर्ष करो, संघर्ष करो||

“जीवन-उद्देश्य “

उस पथ पर चलना बेमानी है, जिसकी कोई मंज़िल नहीं|
वो जीवन जीना बेमानी है, जिसका कोई हासिल नहीं||

क्यों व्यर्थ बोझ बढ़ाना है, अपनी इस धरती मैया का|
बेहतर उठकर उद्धार करें, किसी भटके राही की खिवैया का||

क्यों जिए यहाँ कुछ पता नहीं, क्यों मरे यहाँ कुछ पता नहीं|
उद्देश्य-विहीन इस जीवन को हम जिए यहाँ क्यों पता नहीं||
उठकर मिलकर कुछ करें अभी, तो आंधी चले फिर हवा नहीं|
हर किसी को हर ख़ुशी मिले, कोई आंसू नहीं, कोई गिला नहीं||

राक्षसों से मुक्त कराने को, भगवन ने भी अवतार लिया|
सब दुष्टों का संहार किया, जन-जीवन का उद्धार किया||
उन्ही भगवन को बना पत्थर, मंदिरों में हमने पूजा है|
न सीख ली उनके जीवन से, न उनके संदेशों को जाना है||

तो सुनहरे कल को कल्पित करें कैसे, जब अर्थहीन सब काज है|
कैसे होगा रोशन भविष्य, जब अँधेरे में हमारा आज है||
क्या गीत सजायेंगे हम, आने वाली पीढ़ी के अधरों पर|
जब स्वार्थी हमारे संगीतों में,
न जन सेवा की धुन है, न देशभक्ति का साज है||

आओ मिलकर सब शपथ लें, जीवन स्वार्थ रहित बनाएंगे|
देश और जन सेवा को, अपना परम उद्देश्य बनाएंगे||
न एक पल खाली बैठेंगे, न एक पल व्यर्थ गवाएंगे|
बस जिएंगे जन सेवा के लिए, जन सेवा के लिए मर जायेंगे||