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“संघर्ष”

जब साथ तुम्हारे ख़ुशी न हो
अधरों पे झूठी हंसी न हो
जब मार्ग तुम्हें कोई दिखे नहीं
संघर्ष विकल्प कोई बचे नहीं
तब, नस नस में बहता खून खून
रग रग में उठता ये जूनून
हर पल सहता, हर पल कहता
संघर्ष करो, संघर्ष करो||

जब रात दिन में भेद न हो
और प्रियजनों का मेल न हो
तपती गर्मी की छाया हो
न हाथ तुम्हारे माया हो
तब, सांसों का बढ़ता महावेग
आँखों में आता रक्त तेज़
हर पल सहता, हर पल कहता
संघर्ष करो, संघर्ष करो||

जब पथ में कांटे बिछे रहें
और दुःख के बादल घिरे रहें
जब प्यास तुम्हारी बुझे नहीं
एक बूँद सफलता मिले नहीं
तब, धड़कन का हर गति परिवर्तन
हर अंग में होता ये कम्पन
हर पल सहता, हर पल कहता
संघर्ष करो, संघर्ष करो||