Category Archives: Close To Heart

“ये दूरी एक तपस्या है”

ये विरह बड़ी समस्या है,
तेरी भी और मेरी भी|
ये दूरी एक तपस्या है,
तेरी भी और मेरी भी||

जो किया क्या वो सही किया?
जो जिया क्या वो सही जिया?
तू प्रश्न हमेशा करती है,
मैं उत्तर न दे पाता हूँ,
कि होनी एक अटल अवस्था है,
तेरी भी और मेरी भी|
ये दूरी एक तपस्या है,
तेरी भी और मेरी भी||

मैं कटे फूल सा मुरझाया,
तू बिन बारिश धरती सी है|
मैं सांसों का एक चलता साया,
तू रुकी हुई नदिया सी है|
अनसुलझी सी एक व्यथा है,
तेरी भी और मेरी भी|
ये दूरी एक तपस्या है,
तेरी भी और मेरी भी||

दो जिस्म भले हम दिखते हों,
आत्मा तो अपनी एक है|
दिल दो भले धड़कते हों,
धड़कन तो उनकी एक है|
फिर एक जैसी ही तो तमन्ना है,
तेरी भी और मेरी भी|
ये दूरी एक तपस्या है,
तेरी भी और मेरी भी||

तुझ संग मैं बाग़ सा खिलता हूँ,
और तू कली सी महकती है|
मैं प्रेम गगन में उड़ता हूँ,
जहाँ तू चिड़िया सी चहकती है|
बेसब्र मिलन की इच्छा है,
तेरी भी और मेरी भी|
ये दूरी एक तपस्या है,
तेरी भी और मेरी भी||

पर तुझको याद दिला दूँ मैं,
सब दिन एक जैसे न होंगे|
तुझको ये बात बता दूँ मैं,
हम दूर हमेशा न होंगे|
कि हर पल में यही दुआ है,
तेरी भी और मेरी भी|
ये दूरी एक तपस्या है,
तेरी भी और मेरी भी||

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मैं ऐसे तो न जलता

मेरी तन्हाई की उमस को,
तेरे प्यार की कुछ बूंदें ही मिल जाती..
मैं विरह से ऐसे तो न जलता|
मेरे सूने दिल को,
तेरी धड़कनों की आवाज़ मिल जाती..
मैं विरह से ऐसे तो न जलता||

तेज़ धूप में सूखा पत्ता जल जाता है,
शमां की गर्मी से मोम पिघल जाता है,
जो तू पास होती..
मैं वो पत्ता, वो मोम तो न बनता,
तेरे प्यार की कुछ बूंदें ही मिल जाती..
मैं विरह से ऐसे तो न जलता|

जहाँ लाल दिखे सिर्फ वहीँ तो आग नहीं होती,
मेरी ख़ामोशी तो बिन रंग जला करती है,
जो तू पास होती..
मैं इस तरह से खामोश तो न रहता,
तेरे प्यार की कुछ बूंदें ही मिल जाती..
मैं विरह से ऐसे तो न जलता|

ये जीवन ऐसी माचिस की डिबिया है,
ये दिन रात उस डिबिया की तीलियाँ हैं,
नित जलती तो हैं पर बुझती नहीं,
जो तू पास होती..
मेरा कोई पल ऐसी तीली न बनता,
तेरे प्यार की कुछ बूंदें ही मिल जाती..
मैं विरह से ऐसे तो न जलता|

जब बादलों से छन के धूप निकलती है,
साये से ढंकी ये धरती फिर चमकती है,
जो तू पास होती..
मैं इस तड़प के साये में तो न बसता,
तेरे प्यार की कुछ बूंदें ही मिल जाती..
मैं विरह से ऐसे तो न जलता|

बिन बरसात मैंने इस धरती को जलते देखा है,
बिन आंसुओं के उसे रोते देखा है,
जो तू पास होती..
मैं बारिश की वैसी आस तो न बनता,
तेरे प्यार की कुछ बूंदें ही मिल जाती..
मैं विरह से ऐसे तो न जलता|

किसी बात में ये दिल नहीं लगता,
तुझसे लगा है बस तुझे चाहता है,
जो तू पास होती..
मैं अपने दिल के आगे यूँ बेबस तो न रहता,
तेरे प्यार की कुछ बूंदें ही मिल जाती..
मैं विरह से ऐसे तो न जलता|

बरसों से इन सांसो में एक तेज़ गति है,
जाने कब से एक हलचल सी मन में बसी है,
जो तू पास होती..
मैं हमेशा ऐसे बैचेन तो न रहता,
तेरे प्यार की कुछ बूंदें ही मिल जाती..
मैं विरह से ऐसे तो न जलता|

जब भी तेरी याद आ जाती है,
सिर्फ दिल नहीं, रूह नहीं,
जिस्म के हर रेशे से टकराती है,
जो तू पास होती..
मैं हर घडी ये चोटें तो न सहता,
तेरे प्यार की कुछ बूंदें ही मिल जाती..
मैं विरह से ऐसे तो न जलता|

लगता नहीं कि ज़िन्दगी अब ऐसे चल पायेगी,
या मैं जी पाउँगा या बस जलन रह जाएगी,
कि जो तू पास होती..
मैं ऐसे जल जल के तो न जीता,
तेरे प्यार की कुछ बूंदें ही मिल जाती..
मैं विरह से ऐसे तो न जलता|
मेरे सूने दिल को,
तेरी धड़कनों की आवाज़ मिल जाती..
मैं विरह से ऐसे तो न जलता||

तेरी राह पे मैं चल दूँ

पलकों को बंद करके
तेरी तस्वीरों को याद करके,
बेख्याल सा चल दूँ
तेरी राह पे मैं चल दूँ ||

इन आखों से जो दिखती है
एक बेरंग सी दुनिया है,
“कागज़ों” के पीछे चलती
बड़ी बेढंग सी दुनिया है,
तेरी आँखों को याद करके
रौशनी से मैं मिल लूँ
बस बेख्याल सा चल दूँ
तेरी राह पे मैं चल दूँ ||

यहाँ हवा ठहरी सी है
दीवारों में जकड़ी सी है,
छाँव तो मुझे कहीं दिखी नहीं
बस धूप ही बिखरी सी है,
तेरी ज़ुल्फ़ों को याद करके
ठंडी छाँव से मन भर लूँ
बेख्याल सा चल दूँ
तेरी राह पे मैं चल दूँ ||

तेरे महके से आँगन में
पतझर में भी फूल खिलते हैं,
किरने भी और दमकती हैं
बादल भी खूब बरसते हैं,
तेरे आँचल को याद करके
उसे छूने को फिर तरसूं
बस बेख्याल सा चल दूँ
तेरी राह पे मैं चल दूँ ||

कभी एक शोर सा सुनता हूँ
कभी ख़ामोशी में बहता हूँ,
पागल एक परिंदे सा
बस उड़ता न ठहरता हूँ,
तेरी आवाज़ याद करके
एक राहत सी मैं सुन लूँ
बस बेख्याल सा चल दूँ
तेरी राह पे मैं चल दूँ ||

कितनी ही राहें जाती हैं
कुछ सीधी कुछ मुड़ जाती हैं,
कब से मैं ढूंढू राह तेरी
जो बस तुझ तक लेके जाती है,
खुली पलकों से जो दिखी नहीं
बंद नज़रों से दिख जाती है
वो अकेली राह ही मैं चुन लूँ
बस बेख्याल सा चल दूँ
तेरी राह पे मैं चल दूँ ||

काश कि ये ज़िन्दगी उस सपने जैसी हो जाती

काश कि ये ज़िन्दगी उस सपने जैसी हो जाती,
हर रोज़ सुकून से मैं तेरे पास बैठ पाता,
और हर रोज़ तू मुझे जी भर देख पाती |
काश कि ये ज़िन्दगी उस सपने जैसी हो जाती ||

वो नदी किनारे एक छोटा प्यारा घर है,
चकाचौंध का शोर नहीं,
एक दिया रौशनी भर है,
दीवार पर महंगी सजावटें नहीं हैं,
पर तेरी बनाई कुछ तस्वीरें वहां टंगी हैं|
एक कोने में घड़ा रखा है,
एक कोने में है रसोई,
एक कोने मेरी कुछ किताबें हैं,
और एक कोने में बिछी है चटाई,
उस चटाई पे साथ बैठे
अपनी कुछ बातें हो पाती
काश कि ये ज़िन्दगी उस सपने जैसी हो जाती|

वहां हर सुबह तेरे खिलखिलाने की आवाज़ आती है,
मुझे हर पल तू अपने पास नज़र आती है,
मेरे सारे डर सारी चिंताएं तू छीन लेती है,
मुझे छू के बिन कहे सब कह देती है|
मेरा हाथ पकड़ फिर तू कहीं चल देती है,
कुछ दूर चल के मुझे रोक गले लगा लेती है,
और फिर मेरे कानों में वो प्यारे तीन शब्द कह देती है,
काश कि मेरी सांसें
उन पलों की गवाह हो पाती
काश कि ये ज़िन्दगी उस सपने जैसी हो जाती|

वहां पास के बाजार में एक धुन रोज़ बजती है,
अपनी हर शाम की कुछ घड़ियाँ वहीँ गुज़रती हैं,
कभी इस दुकान, कभी उस दुकान तू मुझे ले जाती है,
थोड़ा थका के फिर घर वापस ले आती है,
कभी खीर कभी सेवइयां तू मुझे खिलाती है,
चीनी से नहीं अपने प्यार से मीठा बनाती है,
फिर घर की छत पे तू ले चलती है,
और पुराना एक गीत रोज़ गुनगुनाती है,
हर रात नींद में वही गीत मैं दोहराता हूँ,
और सोचता हूँ कि
तारों की छांव में कुछ रातें मेरी ऐसे सो पाती
काश कि ये ज़िन्दगी उस सपने जैसी हो जाती|

 

 

तेरी याद परछाई सी मेरे साथ रहती है

कभी आँखों में आस बनकर रहती है
कभी ख्वाबों में ख्याल बनकर रहती है
तेरी याद है कि हर वक़्त
मेरी परछाई सी मेरे साथ रहती है

कभी इस डगर, कभी उस डगर तुझे ढूंढता हूँ
जिधर भी ये नज़रें मुड़ें, उस तरफ तुझे ढूंढता हूँ
मेरे सब्र का बांध, है हर दिन टूटता
और हर दिन, उसे जोड़कर तुझे ढूंढता हूँ
मेरे करीब न होकर भी, तू मेरे सबसे पास रहती है
तेरी याद है कि हर वक़्त
मेरी परछाई सी मेरे साथ रहती है

मैं कहूँ कि सांसें आती जाती हैं तो में जीता हूँ
मैं कहूँ कि ये धड़कनें चलती हैं तो मैं जीता हूँ
मैं ये सब कहूँ तो मैं गलत कहता हूँ
क्योंकि अगर तेरे ख्याल में रहता हूँ तो मैं जीता हूँ
अगर तेरे खुमार में खोता हूँ तो मैं जीता हूँ
एक पागलपन के जैसी मेरे सर पे सवार रहती है
तेरी याद है कि हर वक़्त
मेरी परछाई सी मेरे साथ रहती है

तुझे भी पता है तू साथ न होगी तो चैन न मिलेगा
तुझे इल्म है तू न मिलेगी तो सुकून न मिलेगा
मेरे हर ख़्याल में तू हमसफ़र रही है
बिन तेरे ये सफर चलना पड़ा तो सुकून न मिलेगा
एक वही है जो हर कदम मेरा सहारा बनती है
तेरी याद है कि हर वक़्त
मेरी परछाई सी मेरे साथ रहती है

इस जग में नव संसार मिला

धरती के जैसी सुन्दर तुम
गंगाजल जैसी पावन तुम
एक कली के जैसी कोमल हो
हो अब खुशियों का आंगन तुम
तुम्हें पाकर जीवनसार मिला |
इस जग में नव संसार मिला ||

सागर लहरों सी चंचल तुम
चांदनी से ज्यादा शीतल तुम
संगीत की मधुर कोई सरगम हो
फूलों जैसी मनमोहक तुम
हमें ईश्वर से सुन्दर उपहार मिला |
इस जग में नव संसार मिला ||

प्रकाश के दिव्य रथ पर
वो भानु जैसे सुशोभित है
आभा से तेरे मस्तक की
मेरा अंतःकरण वैसे प्रकाशित है
रग रग को एक आनंद मिला |
इस जग में नव संसार मिला ||

तेरी पलकों की छाव में
जीवन का अब हर दांव है
प्यारी गहरी इन आखों में
जैसे स्वर्ग का सुन्दर गाँव है
समर्पण का नव भाव मिला |
इस जग में नव संसार मिला ||

जब गोद में तुम सो जाती हो
मेरी हर चिंता हर जाती हो
फिर प्यार से जब अंगड़ाई लो
बन मुस्कान अधरों पे आती हो
मुझे प्यार से प्यारा प्यार मिला |
इस जग में नव संसार मिला ||

नन्हे छोटे से हाथों की
मुट्ठी में बंद कुछ सपने हैं
तुझे छू के मुझे अहसास मिले
वो सपने पूरे करने हैं
मेरे मन को नव विश्वास मिला |
इस जग में नव संसार मिला ||

जब से जीवन में आई हो
बस मन-मंदिर में छाई हो
लक्ष्मी के जैसे चरन-कमल
“समृद्धि” का संदेसा लाई हो
तेरे जैसा तेरा नाम मिला |
इस जग में नव संसार मिला ||
तुम्हें पाकर जीवनसार मिला |
इस जग में नव संसार मिला ||

कहीं कुछ खाली सा है

आँखों से सब भरा सा दिखता है,
पर अंदर कहीं कुछ खाली सा है |
जीवन में भले कुछ कमीं नहीं,
फिर भी मन कहीं खोया सा है ||

ये रौशनी जो दिखती है,
वो कहीं अँधेरा तो नहीं,
जिस अँधेरे में जाने से डरता हूँ,
वहीँ कोई सवेरा तो नहीं,
जो कुछ मुझे साफ दिखता है,
लगता है वो कुछ धुंधलाया सा है |
जीवन में भले कुछ कमीं नहीं,
फिर भी मन कहीं खोया सा है ||

अभी तक जो मंजिलें मिली हैं,
वो बस कुछ शुरुआत तो नहीं,
अभी तक जो रास्ते मैं चला हूँ,
वो कोई भूलभुलैया तो नहीं,
जो भी मैंने अब तक हासिल किया,
लगे कि कुछ तो उसमें पराया सा है,
जीवन में भले कुछ कमीं नहीं,
फिर भी मन कहीं खोया सा है ||

सांसों की गिनतियाँ अब कम हो रही हैं,
ज़िन्दगी से चाहतें कुछ कम हो रही हैं,
अपने ही सवालों में कुछ उलझा हूँ ऐसे,
जैसे ज़िन्दगी एक भंवर हो रही है,
जो कुछ भी मैंने देखा या समझा,
लगता है जैसे सब झुठलाया सा है,
आँखों से सब भरा सा दिखता है,
पर अंदर कहीं कुछ खाली सा है |
जीवन में भले कुछ कमीं नहीं,
फिर भी मन कहीं खोया सा है ||