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“तेरा इंतज़ार”

कब फिर से तू मिलेगी मुझे
कितनी तड़प से मुझे ये इंतज़ार है,
किस पल किस घडी तेरी एक झलक मिलेगी मुझे
कितनी हसरत से मुझे ये इंतज़ार है,,

हर उस पल से मेरी शिक़ायत है
जिस पल ने दूर किया तुझसे मुझे,
हर उस शय से मेरी बग़ावत है
कि जो फिर न मिला सकी मुझसे तुझे,,
कब वो मीठी मुस्कान फिर दिखेगी मुझे
कितनी तड़प से मुझे ये इंतज़ार है,
किस पल किस घडी तेरी एक झलक मिलेगी मुझे
कितनी हसरत से मुझे ये इंतज़ार है,,

वक़्त बेवक़्त के झगडे में तू रूठ गया
कभी न चाहा मगर फिर भी तू मुझसे दूर गया,
तमन्नाओं के तिनकों से जोड़ा था जिसे
वो मेरा मासूम दिल एक पल में टूट गया,,
कब वो एक पुरानी सी मुलाक़ात फिर मिलेगी मुझे
कितनी तड़प से मुझे ये इंतज़ार है,
किस पल किस घडी तेरी एक झलक मिलेगी मुझे
कितनी हसरत से मुझे ये इंतज़ार है,,

अब आदत नहीं मुझे तुझसे अलग रहने की
अब आदत नहीं मुझे तेरे बिना जीने की,
सब के बीच रहकर भी बहुत अकेला हूँ मैं
बिन तेरे, यकीं कर, बहुत अधूरा हूँ मैं,,
कब वो निगाँहें फिर छुएंगी मुझे
कितनी तड़प से मुझे ये इंतज़ार है,
किस पल किस घडी तेरी एक झलक मिलेगी मुझे
कितनी हसरत से मुझे ये इंतज़ार है,,