तेरी याद परछाई सी मेरे साथ रहती है

कभी आँखों में आस बनकर रहती है
कभी ख्वाबों में ख्याल बनकर रहती है
तेरी याद है कि हर वक़्त
मेरी परछाई सी मेरे साथ रहती है

कभी इस डगर, कभी उस डगर तुझे ढूंढता हूँ
जिधर भी ये नज़रें मुड़ें, उस तरफ तुझे ढूंढता हूँ
मेरे सब्र का बांध, है हर दिन टूटता
और हर दिन, उसे जोड़कर तुझे ढूंढता हूँ
मेरे करीब न होकर भी, तू मेरे सबसे पास रहती है
तेरी याद है कि हर वक़्त
मेरी परछाई सी मेरे साथ रहती है

मैं कहूँ कि सांसें आती जाती हैं तो में जीता हूँ
मैं कहूँ कि ये धड़कनें चलती हैं तो मैं जीता हूँ
मैं ये सब कहूँ तो मैं गलत कहता हूँ
क्योंकि अगर तेरे ख्याल में रहता हूँ तो मैं जीता हूँ
अगर तेरे खुमार में खोता हूँ तो मैं जीता हूँ
एक पागलपन के जैसी मेरे सर पे सवार रहती है
तेरी याद है कि हर वक़्त
मेरी परछाई सी मेरे साथ रहती है

तुझे भी पता है तू साथ न होगी तो चैन न मिलेगा
तुझे इल्म है तू न मिलेगी तो सुकून न मिलेगा
मेरे हर ख़्याल में तू हमसफ़र रही है
बिन तेरे ये सफर चलना पड़ा तो सुकून न मिलेगा
एक वही है जो हर कदम मेरा सहारा बनती है
तेरी याद है कि हर वक़्त
मेरी परछाई सी मेरे साथ रहती है

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