“जीवन-उद्देश्य “

उस पथ पर चलना बेमानी है, जिसकी कोई मंज़िल नहीं|
वो जीवन जीना बेमानी है, जिसका कोई हासिल नहीं||

क्यों व्यर्थ बोझ बढ़ाना है, अपनी इस धरती मैया का|
बेहतर उठकर उद्धार करें, किसी भटके राही की खिवैया का||

क्यों जिए यहाँ कुछ पता नहीं, क्यों मरे यहाँ कुछ पता नहीं|
उद्देश्य-विहीन इस जीवन को हम जिए यहाँ क्यों पता नहीं||
उठकर मिलकर कुछ करें अभी, तो आंधी चले फिर हवा नहीं|
हर किसी को हर ख़ुशी मिले, कोई आंसू नहीं, कोई गिला नहीं||

राक्षसों से मुक्त कराने को, भगवन ने भी अवतार लिया|
सब दुष्टों का संहार किया, जन-जीवन का उद्धार किया||
उन्ही भगवन को बना पत्थर, मंदिरों में हमने पूजा है|
न सीख ली उनके जीवन से, न उनके संदेशों को जाना है||

तो सुनहरे कल को कल्पित करें कैसे, जब अर्थहीन सब काज है|
कैसे होगा रोशन भविष्य, जब अँधेरे में हमारा आज है||
क्या गीत सजायेंगे हम, आने वाली पीढ़ी के अधरों पर|
जब स्वार्थी हमारे संगीतों में,
न जन सेवा की धुन है, न देशभक्ति का साज है||

आओ मिलकर सब शपथ लें, जीवन स्वार्थ रहित बनाएंगे|
देश और जन सेवा को, अपना परम उद्देश्य बनाएंगे||
न एक पल खाली बैठेंगे, न एक पल व्यर्थ गवाएंगे|
बस जिएंगे जन सेवा के लिए, जन सेवा के लिए मर जायेंगे||

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